दौरे के दूसरे दिन 29 मई को राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की और इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय B. C. Khanduri के आवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों से मुलाकात की।
इसके बाद राजपुर रोड स्थित होटल में दिनभर बैठकों का दौर चला। सबसे पहले सांसदों और विधायकों के साथ बैठक हुई, जिसमें आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी, जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र में अधिक समय देने और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
दोपहर में प्रदेश पदाधिकारियों, मोर्चा अध्यक्षों, जिला प्रभारियों, सह-प्रभारियों और जिला अध्यक्षों के साथ विस्तृत बैठक हुई। बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सक्रिय बनाने, कमजोर बूथों की पहचान करने तथा उन सीटों पर विशेष फोकस करने की रणनीति पर चर्चा हुई जहां पार्टी को पिछले चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।
इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मेयरों, नगर निकाय अध्यक्षों, जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों के साथ बैठक कर स्थानीय निकायों में भाजपा की पकड़ मजबूत करने के लिए कार्ययोजना पर चर्चा की। वहीं शाम को मीडिया, सोशल मीडिया, आईटी और प्रवक्ता टीमों के साथ अलग-अलग बैठकें कर पार्टी के संदेश को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर मंथन किया गया।
दौरे के अंतिम दिन 30 मई को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने देहरादून स्थित Tapkeshwar Temple में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने गढ़ी कैंट क्षेत्र के डाकरा में बूथ अध्यक्ष के घर पहुंचकर कार्यकर्ताओं के साथ समय बिताया और जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती का संदेश दिया।
इसके बाद उन्होंने बूथ समिति की बैठक में हिस्सा लिया और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बूथ को भाजपा की सबसे मजबूत इकाई बताते हुए हर कार्यकर्ता को चुनावी तैयारियों में अभी से जुट जाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि आगामी चुनावों में जीत की आधारशिला बूथ स्तर की मजबूती ही होगी।
कुल मिलाकर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का यह तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरा संगठन को चुनावी मोड में लाने, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बूथ से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक एकजुटता का संदेश देने वाला दौरा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व इसे संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और भविष्य की रणनीति तय करने वाला दौरा बता रहा है।






