Saturday, March 7, 2026
Home स्वास्थ्य लो और हाई ब्लड शुगर: कौन ज्यादा गंभीर है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते...

लो और हाई ब्लड शुगर: कौन ज्यादा गंभीर है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं

डायबिटीज से जुड़ी चर्चाओं में अक्सर हाई ब्लड शुगर पर ही ध्यान दिया जाता है, लेकिन लो ब्लड शुगर यानी हाइपोग्लाइसीमिया कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। यह ऐसी स्थिति है जो अचानक आती है और समय पर संभाला न जाए तो कुछ ही मिनटों में जानलेवा बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना और तुरंत कदम उठाना बेहद जरूरी है।

हाइपोग्लाइसीमिया तब होता है जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर 70 mg/dL से नीचे गिर जाता है। इस स्थिति में दिमाग को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे व्यक्ति बेहोशी या कोमा में जा सकता है। अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों—जैसे पसीना आना, कंपकंपी और घबराहट—को नजरअंदाज कर देते हैं, जो गंभीर गलती साबित हो सकती है।

यह समस्या खासकर तब ज्यादा खतरनाक हो जाती है जब मरीज सो रहा हो या अकेला हो। ऐसे में समय पर मदद मिलना मुश्किल हो सकता है, इसलिए हर डायबिटीज मरीज और उसके परिवार को इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

लो ब्लड शुगर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दवाओं या इंसुलिन की ज्यादा मात्रा लेना, समय पर खाना न खाना, जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करना या खाली पेट शराब का सेवन करना इसके प्रमुख कारण हैं। कई बार मरीज दवा लेने के बाद पर्याप्त भोजन नहीं करते, जिससे शरीर का ग्लूकोज संतुलन बिगड़ जाता है।

इसके लक्षण तेजी से सामने आते हैं। अत्यधिक पसीना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर कांपना, धुंधला दिखना या अचानक तेज भूख लगना—ये सभी संकेत हैं कि शुगर लेवल गिर रहा है। कुछ मामलों में चिड़चिड़ापन, भ्रम या बोलने में दिक्कत भी देखी जाती है। अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई जरूरी है। मरीज होश में हो तो उसे तुरंत मीठी चीजें—जैसे ग्लूकोज, जूस या टॉफी—देनी चाहिए। कुछ समय बाद शुगर दोबारा जांचें और जरूरत पड़ने पर यही प्रक्रिया दोहराएं। शुगर सामान्य होने के बाद संतुलित भोजन देना भी जरूरी है, ताकि स्तर फिर से न गिरे।

विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज मरीजों को हमेशा अपने साथ कोई मीठी चीज और पहचान से जुड़ी जानकारी रखनी चाहिए। दवाओं की मात्रा में खुद बदलाव न करें और नियमित रूप से शुगर की जांच करते रहें। याद रखें, जहां हाई शुगर को नियंत्रित करने के लिए समय मिलता है, वहीं लो शुगर में हर पल महत्वपूर्ण होता है।

RELATED ARTICLES

युवा और बच्चे भी हो रहे सुनने की परेशानी का शिकार, जानिए क्या हैं कारण

आमतौर पर यह माना जाता है कि सुनने की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ कम होती है, लेकिन अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक...

रंगों की होली में कॉन्टैक्ट लेंस से बढ़ सकता है आंखों का खतरा, समझें नुकसान

होली के रंगों के साथ मस्ती करना हर किसी को पसंद होता है, लेकिन इस उत्साह में अक्सर लोग अपनी आंखों की सुरक्षा को...

बच्चे की मालिश कितनी फायदेमंद? डॉक्टरों ने बताया सच

नवजात शिशुओं की मालिश को लेकर हमारे समाज में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। अक्सर यह माना जाता है कि नियमित मालिश से...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे को लेकर तैयारियां तेज

हरिद्वार।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के 7 मार्च 2026 को प्रस्तावित हरिद्वार भ्रमण कार्यक्रम को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा तैयारियों को तेजी...

घर से मिलेगी महिला सशक्तिकरण को मजबूती: रेखा आर्या

देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजभवन स्थित लोक भवन में आयोजित महिला कल्याण उत्कृष्ट सेवा सम्मान एवं ‘मेरी पहचान–2026’ कार्यक्रम में विभिन्न...

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ का ट्रेलर 7 मार्च को आएगा सामने

फिल्म धुरंधर 2 को लेकर दर्शकों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। मेकर्स ने अब फिल्म के ट्रेलर रिलीज की तारीख का ऐलान कर...

चारधाम यात्रा-2026: श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू

देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया आज सुबह सात बजे से शुरू...

Recent Comments