Tuesday, June 9, 2026
Home स्वास्थ्य बढ़ता स्क्रीन उपयोग आंखों को पहुंचा रहा नुकसान, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

बढ़ता स्क्रीन उपयोग आंखों को पहुंचा रहा नुकसान, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

बदलती जीवनशैली और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता का असर अब आंखों की सेहत पर साफ नजर आने लगा है। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन देखने, असंतुलित खानपान और शुगर व ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के ठीक से नियंत्रित न होने के कारण आंखों की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

इन समस्याओं में ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है, जो चुपचाप आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती है। यह रोग धीरे-धीरे आंखों की ऑप्टिक नर्व को प्रभावित करता है और समय रहते पहचान व इलाज न होने पर स्थायी अंधेपन का कारण भी बन सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ग्लूकोमा दुनिया भर में अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते, जिस वजह से लोग देर से डॉक्टर तक पहुंचते हैं।

क्या है ग्लूकोमा?

ग्लूकोमा में आंखों के अंदर दबाव बढ़ जाता है, जिससे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। आंखों में मौजूद तरल पदार्थ का सही तरीके से बाहर न निकल पाना इस दबाव को बढ़ा देता है। उम्र बढ़ने के साथ इस बीमारी का खतरा बढ़ता जाता है। इसके अलावा जिन लोगों को डायबिटीज है, जिनके परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा रहा हो या जिन्हें आंखों में चोट लगी हो, उनमें इसका जोखिम अधिक होता है।

किन लक्षणों पर दें ध्यान

नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार ग्लूकोमा की शुरुआत में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। लेकिन बीमारी बढ़ने पर धीरे-धीरे किनारों से दिखाई देना कम होने लगता है। आंखों में भारीपन, दर्द, सिरदर्द या रोशनी के चारों ओर घेरा नजर आना भी इसके संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

बचाव और सावधानी जरूरी

हालांकि ग्लूकोमा से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन समय पर जांच और उपचार से अंधेपन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही संतुलित आहार, जिसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल हों, आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है। शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी आंखों की रोशनी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है।

RELATED ARTICLES

घंटों एक जगह बैठे रहने से बढ़ सकता है हार्ट अटैक का जोखिम

बदलती जीवनशैली और बढ़ते काम के दबाव के बीच हृदय रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि...

दिनभर सुस्ती और थकावट महसूस होती है? इन कारणों को न करें नजरअंदाज

दिनभर सुस्ती, काम में मन न लगना और बार-बार नींद आना आजकल कई लोगों की आम समस्या बन चुकी है। अक्सर लोग इसे व्यस्त...

विशेषज्ञ बोले—तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक

तंबाकू और धूम्रपान आज दुनिया के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य चेतावनियों के बावजूद करोड़ों लोग सिगरेट,...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

दर्शकों की पहली पसंद बनी ‘पेद्दी’, कमाई के आंकड़ों ने चौंकाया

साउथ सुपरस्टार राम चरण की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘पेद्दी’ सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर छा गई है। दर्शकों के बीच लंबे समय...

मतदाता सूची अपडेट करने की कवायद तेज, बीएलओ कर रहे घर-घर संपर्क

पौड़ी- भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जनपद पौड़ी गढ़वाल में 01 जुलाई, 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम...

समाधान दिवस में डीएम का एक्शन मोड, शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर

जन समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के उद्देश्य से सोमवार को आयोजित ‘समाधान दिवस’ में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने 194 नागरिकों की...

जौनसार की लोक परंपराएं और प्रकृति प्रेम राज्य की पहचान : मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवर को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री केदार सिंह स्टेडियम, नागथात, देहरादून में आयोजित जौनसार बावर लोक सांस्कृतिक महोत्सव एवं...

Recent Comments