गैस कंपनियों के अनुसार, ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर संबंधित कनेक्शन को निष्क्रिय श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसे उपभोक्ताओं को घरेलू श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभ प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें नियमानुसार व्यावसायिक श्रेणी के सिलेंडर की दरों के अनुसार शुल्क देना पड़ सकता है।
घरेलू गैस कनेक्शनों का आधार आधारित सत्यापन किए जाने का उद्देश्य गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाना तथा फर्जी और डुप्लीकेट कनेक्शनों की पहचान करना है। इसके साथ ही वास्तविक उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड अपडेट करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। पीएनजी और एलपीजी दोनों प्रकार के कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं का डाटा भी इस प्रक्रिया के माध्यम से बेहतर तरीके से चिन्हित किया जा सकेगा।
जिला पूर्ति अधिकारी, गैस एजेंसी संचालकों और गैस कंपनियों के अधिकारियों द्वारा उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपनी ई-केवाईसी पूरी करा लें।
जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि उपभोक्ता अपनी संबंधित गैस एजेंसी पर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके अलावा कई गैस कंपनियों द्वारा अपने मोबाइल ऐप और अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। घर-घर सिलेंडर पहुंचाने वाले डिलीवरी कर्मियों के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि 15 अगस्त की अंतिम तिथि से पहले ई-केवाईसी अवश्य करा लें, ताकि भविष्य में गैस आपूर्ति से संबंधित किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।






