Friday, July 24, 2026
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कितने दिन में बदल लेना चाहिए तकिए का कवर? लापरवाही की तो इतनी ज्यादा बिगड़ सकती है तबीयत

बिस्तर पर सुकून की नींद के लिए तकिया होना जरूरी होता है. कुछ लोग तो कई तकिए लेकर सोते हैं. तकिए के साथ सोना तब तक गलत नहीं होता है, जब तक कई-कई दिनों तक उसके कवर को बदला न जाए. दरअसल, पिलोकेस अगर सही समय न बदला जाए तो बैक्टीरिया और बीमारियों उसे अपना घर बना सकते हैं. इससे स्किन से जुड़ी कई दिक्कतें हो सकती हैं, इसलिए एक निश्चित समय के बाद तकिए के कवर को जरूर बदल देना चाहिए।

बीमारियों का घर है तकिए का कवर
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कम से कम हर हफ्ते तकिए का कवर बदलना चाहिए. अगर ऐसा नहीं करते हैं तो स्किन को काफी नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. स्किन से जुड़ी बीमारियां फैल सकती है. कई बार तो इसका इलाज करवाना भी काम नहीं आता है. दवा बेअसर साबित हो सकती है।

हर हफ्ते न बदले तकिए का कवर तो क्या होगा
हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि तकिए की खोल यानी कवर हर हफ्ते बदल लेना चाहिए. दरअसल, तकिए के कवर में हर दिन धूल और कण के अलावा तेल, डेड स्किन, हानिकारक बैक्टीरिया, कई तरह की गंदगी और घर में अगर पालतू जानवर हैं तो उनके बाल चिपक जाते हैं. जिसकी वजह से चेहरे पर पिंपल्स, दाग-धब्बे आने लगते हैं. इसलिए समय-समय पर पिलोकेस बदलने रहना चाहिए. वरना चेहरे कि स्किन पूरी तरह तबाह हो सकती है. इतना ही नहीं हर छह महीने में एक बार तकिए को साफ या ड्राई क्लीन या उसे भी बदल देना चाहिए.
अगर हफ्ते में आप अपना पिलो कवर नहीं बदलते तो यह एलर्जी का कारण बन सकता है।

कई बार इसकी वजह से इंफेक्शन हो सकता है. हर दिन लोग अलग अलग जगह से आने के बाद बेड पर आते हैं ऐसे में यह अनहाइजीनिक भी हो सकता है. इसके अलावा अगर आप समय समय पर अपनी बेडशीट और पिलो कवर नहीं बदलते तो यह कंफर्ट कम कर देता है. आरामदायक महसूस होने की जगह अनकंफरटेबल फील होने लगता है. पिलो कवर बदलने से आपका तकिया की उम्र भी बढ़ जाती है. इसके अलावा समय समय पर बेडशीट और तकिया का कवर बदलने से पॉजिटिविटी आती है और कमरे की खूबसूरती बढ़ जाती है।

तकिए का कवर कैसे लें
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर तकिए का कवर सिल्क का है तो बैक्टीरिया कम लगते हैं. इससे चेहरे पर पिंपल्स भी नहीं निकलते हैं. स्टडी में पाया गया कि स्किन की सेहत के लिए तकिए में कॉटन नहीं सिल्क कवर ज्यादा अच्छा होता है. इससे दिक्कते होने का रिस्क कम होता है।

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