स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कब्ज होने पर मल त्याग में कठिनाई, पेट में भारीपन और असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके पीछे खानपान में फाइबर की कमी, पर्याप्त तरल पदार्थ न लेना, शारीरिक गतिविधियों का अभाव और कुछ दवाओं का प्रभाव जैसे कारण हो सकते हैं। यदि यह परेशानी बार-बार होती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहता है।
अध्ययन में कब्ज और एक्जिमा के बीच क्या मिला?
ताइवान में एक लाख 70 हजार से अधिक लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कब्ज से परेशान लोगों में एक्जिमा होने का जोखिम उन लोगों की तुलना में लगभग दोगुना था, जिन्हें कब्ज की समस्या नहीं थी। हालांकि, इस निष्कर्ष से यह साबित नहीं होता कि कब्ज सीधे तौर पर एक्जिमा का कारण बनता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों समस्याओं के बीच संबंध को बेहतर ढंग से समझने के लिए और शोध की जरूरत है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि एक्जिमा से पीड़ित लोगों में कब्ज होने की आशंका अधिक रहती है या नहीं।
आंतों की सेहत और त्वचा के बीच क्या है संबंध?
आंतों और त्वचा का संबंध समझने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर ध्यान देना जरूरी है। आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव पाचन के साथ-साथ प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में भी भूमिका निभाते हैं। इनके संतुलन में बदलाव कुछ लोगों में सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
एक्जिमा त्वचा की ऐसी स्थिति है, जिसमें खुजली, रूखापन, लालिमा और सूजन हो सकती है। इसके पीछे आनुवंशिक कारण, त्वचा की सुरक्षात्मक परत में कमजोरी, प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रियाएं और पर्यावरणीय कारक भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए त्वचा पर होने वाले हर दाने या चकत्ते को कब्ज का परिणाम मानना सही नहीं है।
फाइबर और संतुलित खानपान से मिल सकती है मदद
कब्ज से बचाव के लिए रोजाना के खानपान और दिनचर्या में कुछ बदलाव उपयोगी हो सकते हैं। विशेषज्ञ आमतौर पर निम्न उपायों की सलाह देते हैं:
फाइबर युक्त भोजन: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य फाइबर वाले खाद्य पदार्थ आहार में शामिल करें। फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।
पर्याप्त पानी: दिनभर पर्याप्त तरल पदार्थ लें। जरूरत व्यक्ति की उम्र, गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है।
नियमित शारीरिक गतिविधि: टहलने और सक्रिय दिनचर्या अपनाने से आंतों की सामान्य गतिविधियों को सहारा मिल सकता है।
नियमित शौच की आदत: मल त्याग की इच्छा को बार-बार न टालें और इसके लिए पर्याप्त समय दें।
प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ: दही जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, हालांकि कब्ज में इनका लाभ हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि कब्ज लंबे समय से बनी हुई है, बार-बार लौटती है या घरेलू उपायों से राहत नहीं मिल रही है, तो डॉक्टर से परामर्श लें। मल में खून आने, बिना कारण वजन घटने, लगातार पेट दर्द या अचानक मल त्याग की आदत बदलने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। तेज पेट दर्द के साथ उल्टी या पेट में बहुत अधिक सूजन होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
इसी तरह, त्वचा पर लगातार खुजली, सूजन या चकत्ते बने रहने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। पाचन और त्वचा की समस्याओं का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।








