Friday, July 24, 2026
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एनर्जी ड्रिंक और पैकेज्ड जूस बन रहे स्वास्थ्य का दुश्मन, एक्सपर्ट अलर्ट

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में खान-पान की आदतें स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कई गंभीर बीमारियों की जड़ हमारी रोज़मर्रा की डाइट में छिपी है। खास तौर पर मीठे पेय पदार्थ—जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेट बंद जूस, फ्लेवर्ड मिल्क और एनर्जी ड्रिंक्स—सेहत पर चुपचाप लेकिन गहरा असर डाल रहे हैं।

टीवी और डिजिटल विज्ञापनों में इन ड्रिंक्स को ताकत, फुर्ती और स्टैमिना बढ़ाने वाला बताया जाता है। वर्कआउट के बाद थकान दूर करने या खेल के दौरान ऊर्जा पाने के लिए युवा वर्ग इन्हें तेजी से अपना रहा है। लेकिन डॉक्टरों की चेतावनी है कि यही आदत भविष्य में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है, खासकर लिवर से जुड़ी समस्याओं की।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इन पेय पदार्थों में अत्यधिक मात्रा में मिलाई गई शुगर होती है, जिसमें फ्रक्टोज प्रमुख है। फ्रक्टोज का मेटाबॉलिज्म सीधे लिवर में होता है। जब शरीर को जरूरत से ज्यादा फ्रक्टोज मिलता है, तो लिवर इसे फैट में बदलकर जमा करने लगता है। लंबे समय तक ऐसा होने से फैटी लिवर डिज़ीज़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, जो लोग रोज़ाना मीठे पेय का सेवन करते हैं, उनमें फैटी लिवर की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक पाई गई है। यह बीमारी आगे चलकर स्टीटोहेपेटाइटिस जैसे गंभीर लिवर रोग में बदल सकती है, जिसमें लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अधिक शुगर वाली डाइट शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन को बढ़ाती है। समय के साथ यह सूजन लिवर में स्थायी घाव (स्कार टिश्यू) बना सकती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

लिवर ही नहीं, मीठे पेय शरीर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। शोध के मुताबिक, नियमित रूप से कोल्ड ड्रिंक या शुगर ड्रिंक्स पीने से पेट की चर्बी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्यास बुझाने के लिए पानी, नारियल पानी या बिना शक्कर वाले प्राकृतिक पेय को प्राथमिकता दी जाए। छोटी-सी यह सावधानी भविष्य में बड़ी बीमारियों से बचा सकती है।

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